इंटरनेट का प्रेमजाल
------------------------ संजीव निगम
आजकल मैं इस बात को मजबूती से महसूस कर रहा हूँ कि अगर पूरे विश्व में
लडकियाँ किसी एक व्यक्ति पर मर मिटने को उतारू हैं तो वह मैं हूँ। यह
एकमात्र प्रेम पुरुष होने की भावना मेरे मन में उतनी ही गहरी है जितनी हर
नेता के दिल में देश का एकमात्र ईमानदार व्यक्ति होने की ।
मुझसे मिलने के लिए , मुझ पर अपना प्यार लुटाने के जितने ऑफर मुझे हर रोज़
मिलते हैं उन्हें देख कर मैं अपना कम्पटीशन अब सीधे भगवान कृष्ण से देखता
हूँ। बल्कि मेरा यह मानना है कि प्रेम की इस ओपन मार्किट में मैं उनसे कई
कदम आगे निकल गया हूँ। उन्हें तो सिर्फ बृज की गोपियों ने ही प्यार किया था
पर मेरे लिए तो ऐसे ऐसे देशों की कन्याओं ने प्यार का तूफ़ान उठाया हुआ है
जहाँ जाने के लिए हवाई जहाज़ का टिकट तक खरीदने की मेरी औकात नहीं है।
भगवान श्री कृष्ण ने तो बचपन से ही ऐसे पराक्रम दिखाए थे कि उनकी तरफ गोपियों
का आकर्षित हो जाना ऐसे ही स्वाभाविक था जैसा कोंग्रेसियों का राहुल जी की
तरफ। पर मैं ! मैं तो भारतीय मध्यम वर्ग का बंदा हूँ जिसके लिए पराक्रम का
एक ही अर्थ होता है बिना किसी से उधार लिए एक तारीख से तीस तारीख तक घर चला
लेना। लेकिन अगर नसीब में ऐयाशी लिखी हो तो जंगल में भी डिस्कोथिक मिल सकता
है। ऐसा ही मेरे साथ हो रहा है। मेरे ईमेल के इनबॉक्स में एक ही दिन में
अर्पा , सरिता , असरा खान , काजल , हुओंग त्राण , प्रियंका , डाला सराओ ,
चम्पा बाइन सबके प्रेम सन्देश एक साथ आते हैं और ऐसे सन्देश रोज़ आते हैं, वह
भी नयी नयी लड़कियों के। रोज़ नयी नयी बालाओं का प्रेम प्रलाप। सब मुझसे
प्यार करने को बेताब। ओह ! ऐसा लगता है जैसे ये मेरा ईमेल अकाउंट नहीं बल्कि
प्रेम डॉट कॉम की वेब साइट है। मुझे ऐसा महसूस होता है जैसेकि द्रौपदी की
जगह मेरा स्वयम्बर हुआ जा रहा है। मेरा बस चले तो इन सबके गले में वरमाला डाल
दूँ। धर्मनिरपेक्षता और अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव बढ़ाने की दिशा में इससे ज़्यादा
टिकाऊ काम और क्या हो सकता है ?
वैसे मेरा ईमेल सिर्फ प्रेमिकाएं सप्लाई करने का ए टी एम ही नहीं है ,
पौंड , डॉलर और यूरो निकालने का भी है। रोज़ मेरे पास ऐसे सन्देश आते हैं
जिनसे मुझे पता चलता है कि अफ्रीका के किसी देश में किसी बेऔलाद बुढ़िया ने
इसलिए मरना मंज़ूर कर लिया क्योंकि उसे मेरे रूप में अपनी लाखों डॉलर की रकम
का वारिस मिल गया । कोई लाखों पौंड की अंतर्राष्ट्रीय लॉटरी के इनाम की रकम
मेरे खाते में ट्रांसफर हो जाने के लिए ऐसे मचल रही है जैसे कोई शराबी ड्राई
डे के दिन शराब के लिए मचलता है। ये तो ईमानदारी की मेरी खानदानी बीमारी ने
कमज़ोर कर रखा है वरना अभी तक तो मैं अम्बानी से भी ऊपर होता।
पैसे और प्यार का ऐसा अद्भुत संयोग मेरी कुंडली में लिखा है इसे देख कर तो जलन
के मारे मेरी कुंडली बनाने वाले ज्योतिषी के मन में आत्महत्या के विचार आने
लगे हैं। लेकिन अब तो बात बहुत आगे तक बढ़ गयी है। मुझसे प्यार जताने वालों
ने अति कर डाली है क्योंकि आज तो किसी प्रेम नारायण का प्रेम निवेदन आ गया
है।
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------------------------ संजीव निगम
आजकल मैं इस बात को मजबूती से महसूस कर रहा हूँ कि अगर पूरे विश्व में
लडकियाँ किसी एक व्यक्ति पर मर मिटने को उतारू हैं तो वह मैं हूँ। यह
एकमात्र प्रेम पुरुष होने की भावना मेरे मन में उतनी ही गहरी है जितनी हर
नेता के दिल में देश का एकमात्र ईमानदार व्यक्ति होने की ।
मुझसे मिलने के लिए , मुझ पर अपना प्यार लुटाने के जितने ऑफर मुझे हर रोज़
मिलते हैं उन्हें देख कर मैं अपना कम्पटीशन अब सीधे भगवान कृष्ण से देखता
हूँ। बल्कि मेरा यह मानना है कि प्रेम की इस ओपन मार्किट में मैं उनसे कई
कदम आगे निकल गया हूँ। उन्हें तो सिर्फ बृज की गोपियों ने ही प्यार किया था
पर मेरे लिए तो ऐसे ऐसे देशों की कन्याओं ने प्यार का तूफ़ान उठाया हुआ है
जहाँ जाने के लिए हवाई जहाज़ का टिकट तक खरीदने की मेरी औकात नहीं है।
भगवान श्री कृष्ण ने तो बचपन से ही ऐसे पराक्रम दिखाए थे कि उनकी तरफ गोपियों
का आकर्षित हो जाना ऐसे ही स्वाभाविक था जैसा कोंग्रेसियों का राहुल जी की
तरफ। पर मैं ! मैं तो भारतीय मध्यम वर्ग का बंदा हूँ जिसके लिए पराक्रम का
एक ही अर्थ होता है बिना किसी से उधार लिए एक तारीख से तीस तारीख तक घर चला
लेना। लेकिन अगर नसीब में ऐयाशी लिखी हो तो जंगल में भी डिस्कोथिक मिल सकता
है। ऐसा ही मेरे साथ हो रहा है। मेरे ईमेल के इनबॉक्स में एक ही दिन में
अर्पा , सरिता , असरा खान , काजल , हुओंग त्राण , प्रियंका , डाला सराओ ,
चम्पा बाइन सबके प्रेम सन्देश एक साथ आते हैं और ऐसे सन्देश रोज़ आते हैं, वह
भी नयी नयी लड़कियों के। रोज़ नयी नयी बालाओं का प्रेम प्रलाप। सब मुझसे
प्यार करने को बेताब। ओह ! ऐसा लगता है जैसे ये मेरा ईमेल अकाउंट नहीं बल्कि
प्रेम डॉट कॉम की वेब साइट है। मुझे ऐसा महसूस होता है जैसेकि द्रौपदी की
जगह मेरा स्वयम्बर हुआ जा रहा है। मेरा बस चले तो इन सबके गले में वरमाला डाल
दूँ। धर्मनिरपेक्षता और अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव बढ़ाने की दिशा में इससे ज़्यादा
टिकाऊ काम और क्या हो सकता है ?
वैसे मेरा ईमेल सिर्फ प्रेमिकाएं सप्लाई करने का ए टी एम ही नहीं है ,
पौंड , डॉलर और यूरो निकालने का भी है। रोज़ मेरे पास ऐसे सन्देश आते हैं
जिनसे मुझे पता चलता है कि अफ्रीका के किसी देश में किसी बेऔलाद बुढ़िया ने
इसलिए मरना मंज़ूर कर लिया क्योंकि उसे मेरे रूप में अपनी लाखों डॉलर की रकम
का वारिस मिल गया । कोई लाखों पौंड की अंतर्राष्ट्रीय लॉटरी के इनाम की रकम
मेरे खाते में ट्रांसफर हो जाने के लिए ऐसे मचल रही है जैसे कोई शराबी ड्राई
डे के दिन शराब के लिए मचलता है। ये तो ईमानदारी की मेरी खानदानी बीमारी ने
कमज़ोर कर रखा है वरना अभी तक तो मैं अम्बानी से भी ऊपर होता।
पैसे और प्यार का ऐसा अद्भुत संयोग मेरी कुंडली में लिखा है इसे देख कर तो जलन
के मारे मेरी कुंडली बनाने वाले ज्योतिषी के मन में आत्महत्या के विचार आने
लगे हैं। लेकिन अब तो बात बहुत आगे तक बढ़ गयी है। मुझसे प्यार जताने वालों
ने अति कर डाली है क्योंकि आज तो किसी प्रेम नारायण का प्रेम निवेदन आ गया
है।
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